मो.फ़ारूक़ की रिपोर्ट 

छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य विभाग द्वारा 12 मार्च को एक महत्वपूर्ण आदेश जारी किया गया था। आदेश में साफ कहा गया था कि विभाग के अंतर्गत जिन भी अधिकारियों और कर्मचारियों को उनके मूल पदस्थापना स्थल से हटाकर अन्य स्थानों पर संलग्न किया गया है, उन्हें तत्काल प्रभाव से उनके मूल पदस्थापना वाले स्थान पर वापस भेजा जाए। लेकिन हैरानी की बात यह है कि आदेश जारी होने के कई दिन बीत जाने के बाद भी एमसीबी और कोरिया जिले में इस आदेश को जिम्मेदार अधिकारी नजरअंदाज करते नजर आ रहे हैं।

स्वास्थ्य विभाग के इस आदेश के बाद उम्मीद जताई जा रही थी कि वर्षों से संलग्नीकरण के नाम पर चल रही व्यवस्थाओं में सुधार होगा और अधिकारियों-कर्मचारियों को उनके मूल पदस्थापना वाले स्थान पर भेजा जाएगा।
लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है।


एमसीबी और कोरिया जिले में कई ऐसे अधिकारी और कर्मचारी अब भी दूसरे स्थानों पर संलग्न होकर काम कर रहे हैं, जबकि विभागीय आदेश स्पष्ट रूप से उन्हें वापस भेजने की बात कहता है।
सूत्रों की मानें तो आदेश के बाद भी जिम्मेदार अधिकारी इस पर अमल कराने में कोई खास दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं। ऐसे में यह सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर आदेश जारी होने के बाद भी कार्रवाई क्यों नहीं हो रही?
क्या किसी दबाव या सिफारिश के चलते इस आदेश को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है?
या फिर विभागीय अधिकारियों की लापरवाही के कारण शासन का आदेश फाइलों तक ही सीमित रह गया है?
*बड़े सवाल:*
12 मार्च को जारी आदेश पर अब तक अमल क्यों नहीं हुआ?

एमसीबी और कोरिया जिले के जिम्मेदार अधिकारी आखिर किसके दबाव में हैं?

संलग्न अधिकारियों और कर्मचारियों को उनके मूल पदस्थापना स्थल पर कब भेजा जाएगा?

क्या शासन इस मामले में सख्त कार्रवाई करेगा?

अब देखना यह होगा कि स्वास्थ्य विभाग का यह आदेश कब तक जमीन पर उतरता है और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय होती है या नहीं।
फिलहाल जनता और विभागीय कर्मचारी यही पूछ रहे हैं—आखिर जवाब देगा कौन?

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